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CoWIN Portal में फेरबदलः वैक्सिनेशन को एक नंबर से अब इतने लोग करा सकते हैं रजिस्ट्रेशन, नई सुविधा भी जुड़ी
कोरोना संकट के बीच कोविन पोर्टल में फेरबदल किया गया है। अब एक नंबर से छह लोग रजिस्ट्रेशन करा सकेंगे। साथ ही एक नई सुविधा को भी जोड़ा गया है। शुक्रवार (22 जनवरी, 2022) को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से इस बारे में विस्तृत जानकारी दी गई।
मंत्रालय ने बताया कि ‘कोविन’ पर एक मोबाइल नंबर से अब चार की बजाय छह लोग पंजीकरण करा सकते हैं। कोविन के “रेज एन इश्यू” सेक्शन के तहत एक और सुविधा शुरू की गई है जिससे लाभार्थी टीकाकरण की वर्तमान स्थिति को ‘पूर्ण टीकाकरण’ से ‘आंशिक टीकाकरण’ या ‘बगैर टीकाकरण’ और ‘आंशिक टीकाकरण’ से ‘बगैर टीकाकरण’ में बदल सकता है।
मंत्रालय ने कहा, “कुछ मामलों में जहां अनजाने में गलती से टीकाकरण प्रमाण पत्र जारी हो जाता है, लाभार्थी टीकाकरण की स्थिति को ठीक कर सकते हैं।” मंत्रालय ने कहा कि “रेज एन इश्यू” के जरिये ऑनलाइन अनुरोध करने के तीन से सात दिन के भीतर परिवर्तन हो सकता है।
इस बीच, स्वास्थ्य मंत्रालय ने साफ किया कि ‘को-विन’ पोर्टल से कोई डेटा लीक नहीं हुआ है। लोगों के बारे में पूरी जानकारी सुरक्षित है क्योंकि यह डिजिटल मंच किसी व्यक्ति का ना तो पता और ना ही कोविड-19 टीकाकरण के लिए आरटी-पीसीआर जांच के नतीजों को एकत्र करता है।
मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ‘‘मीडिया में आई कई खबरों में दावा किया गया है कि को-विन पोर्टल में एकत्रित डेटा ऑनलाइन लीक हो गया है।’’ बयान में कहा गया है, ‘‘यह स्पष्ट किया जाता है कि को-विन पोर्टल से कोई डेटा लीक नहीं हुआ है और लोगों पूरा डेटा इस डिजिटल मंच पर सुरक्षित है।’’
इसमें कहा गया है, ‘‘यह भी स्पष्ट किया जाता है कि प्रथम दृष्टया यह दावा सत्य नहीं है और केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय खबरों की सच्चाई के बारे में पड़ताल करेगा क्योंकि को-विन लोगों का ना तो पता और ना ही कोविड-19 टीकाकरण के लिए आरटी-पीसीआर जांच के नतीजे एकत्र करता है।’’
दरअसल, केंद्र की यह सफाई उन खबरों को लेकर आई, जिनमें दावा किया गया था कि भारत में हजारों लोगों का पर्सनल डेटा एक सरकारी सर्वर से लीक हो गया है जिसमें उनका नाम, मोबाइल नंबर, पता और कोविड जांच परिणाम शामिल हैं और इन सूचनाओं को ऑनलाइन खोज के माध्यम से प्राप्त किया जा सकता है।
कहा गया था कि लीक डेटा को ‘रेड फोरम’ की वेबसाइट पर बिक्री के लिए रखा गया, जहां एक साइबर अपराधी ने 20,000 से अधिक लोगों के व्यक्तिगत डेटा होने का दावा किया। रेड फोरम पर डाले गये डेटा से इन लोगों का नाम, उम्र, लिंग, मोबाइल नंबर, पता, तारीख और कोविड-19 जांच के परिणाम का पता चलता है।
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