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Chandra Grahan November 2021 : कुछ घंटों के लिए पृथ्वी की छाया में ढक जाएगा चंद्रमा, 580 साल बाद होगा इतना लंबा ग्रहण, जानें- कहां-कहां दिखेगा
18 फरवरी 1440 के बाद पहली बार ऐसा हो रहा है जब पृथ्वी चंद्रमा को अपनी छाया से सबसे लंबे समय तक ढका रखेगी । अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा के मुताबिक 18 और 19 नवंबर की दरमियानी रात पड़ने वाला चंद्रग्रहण बीते 580 सालों में सबसे लंबा ग्रहण होगा। आपको बता दें ये ग्रहण अलग-अलग देशों के टाइमजोन के हिसाब से देखा जा सकता है। अगर भारत की बात करें तो इस दुर्लभ चंद्रग्रहण को 19 नवंबर को दोपहर 12 बजकर 48 मिनट से शाम 4 बजकर 17 मिनट तक देखा जा सकेंगा।
भारत के इन राज्यों में दिखेगा चंद्र ग्रहण – भारत के उत्तर – पूर्वी राज्यों में ये सबसे लंबा आंशिक चंद्र ग्रहण देखा जा सकेगा। एमपी बिड़ला प्लेनेटोरियम के रिसर्च एवं अकादमिक विभाग के निदेशक देबीप्रसाद दुआरी ने समाचार एजेंसी पीटीआई से बात करते हुए बताया है कि ये चंद्र ग्रहण अरुणाचल प्रदेश और असम के कुछ हिस्सों में दिखाई देगा। दुआरी के अनुसार इस आंशिक चंद्र ग्रहण की अवधि 3 घंटे 28 मिनट और 24 सेकेंड होगी। इससे पहले इतना लंबा चंद्रग्रहण 18 फरवरी 1440 को पड़ा था और अगला मौका 8 फरवरी, 2669 में आएगा।
इन देशों में दिखाई देगा ये चंद्र ग्रहण – बीते 580 साल में पड़ने वाला सबसे लंबा चंद्र ग्रहण भारत के साथ-साथ दक्षिण अमेरिका, पूर्वी एशिया, ऑस्ट्रेलिया और प्रशांत क्षेत्र में देखा जा सकेगा। अगर अमेरिका में इस ग्रहण के देखे जाने के बात करें तो यूएस ईस्ट कोस्ट में आंशिक चंद्र ग्रहण को रात 2 बजे से सुबह 4 बजे तक देखा जा सकता है। वहीं वेस्ट कोस्ट में रात 11 बजे से रात 1 बजे तक देखा जा सकता है।
आंशिक चंद्र ग्रहण और पूर्ण चंद्र ग्रहण में अंतर – जहां चंद्रमा पूरी तरह से पृथ्वी की छाया से ढका होता है। उसे पूर्ण चंद्र ग्रहण करते हैं। वहीं जब चंद्रमा को पृथ्वी अपनी छाया में आंशिक रूप से ढकती है तो ये ग्रहण आंशिक होता है। आपको बता दें 19 नवंबर के आंशिक चंद्र ग्रहण के दो हफ़्ते बाद 4 दिसंबर 2021 पूर्ण सूर्य ग्रहण लगेगा। इसके बाद भारत में अगला चंद्र ग्रहण 8 नवंबर 2022 को देखा जाएगा। नासा के मुताबिक़, एक साल में अधिकतम तीन चंद्र ग्रहण हो सकते हैं। नासा का अनुमान है कि 21वीं सदी में कुल 228 चंद्र ग्रहण होंगे।
कब लगता है चंद्रग्रहण? सूर्य की परिक्रमा के दौरान पृथ्वी, चांद और सूर्य के बीच में इस तरह आ जाती है कि चांद धरती की छाया से छिप जाता है। यह तभी संभव है जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा अपनी कक्षा में एक दूसरे की बिल्कुल सीध में हों। पूर्णिमा के दिन जब सूर्य और चंद्रमा की बीच पृथ्वी आ जाती है तो उसकी छाया चंद्रमा पर पड़ती है। इससे चंद्रमा का छाया वाला भाग अंधकारमय रहता है। और इस स्थिति में जब हम धरती से चांद को देखते हैं तो वह भाग हमें काला दिखाई पड़ता है। इसी वजह से इसे चंद्र ग्रहण कहा जाता है।
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