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परमाणु ऊर्जा तैयार करने का सबसे बड़ा प्रयोग
दुनिया के सबसे बड़े ‘परमाणु संलयन’ रिएक्टर (न्यूक्लियर फ्यूजन रिएक्टर) में ईंधन परीक्षण को शुरू कर दिया गया है। वैज्ञानिकों की एक टीम फ्रांस में ‘फ्यूजन रिएक्टर’ को ताकत देने के लिए हाइड्रोजन के एक अत्यंत दुर्लभ रूप की क्षमता का परीक्षण कर रहे हैं। अगर उनका यह परीक्षण सफल साबित होता है, तो इससे दुनिया को क्लीन एनर्जी का बड़ा जरिया मिल जाएगा। इससे न केवल जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता घटेगी, बल्कि पर्यावरण को भी लाभ होगा।
न्यूक्लियर फ्यूजन को हिंदी में परमाणु संलयन कहा जाता है। यह तब होता है जब दो परमाणु एक में जुड़ते हैं। इससे भारी मात्रा में ऊर्जा निकलती है, जो सूर्य और अन्य सितारों को ताकत प्रदान करने के लिए पर्याप्त है। संलयन केवल तब होता है, जब परमाणु अत्यधिक गर्मी और दबाव में होते हैं।
‘परमाणु संलयन’ की प्रतिक्रिया (न्यूक्लियर फ्यजून रिएक्शन) से 15 करोड़ डिग्री सेल्सियस का तापमान पैदा होता है। इसकी वजह से ऐसा प्लाज्मा पैदा होता है, जिसमें हाइड्रोजन के आइसोटोप्स (ड्यूटीरियम और ट्राइटियम) मिलकर हीलियम और न्यूट्रॉन बनाते हैं। शुरुआत में प्रतिक्रिया से गर्मी पैदा हो, इसके लिए ऊर्जा की खपत होती है।
एक बार प्रतिक्रिया शुरू हो जाने पर ऊर्जा भी पैदा होने लगती है। फ्रांस का ‘इंटरनेशनल थर्मोन्यूक्लियर एक्सपेरिमेंटल रिएक्टर’ (आइटीईआर) पहला ऐसा परमाणु संयंत्र है, जिसका उद्देश्य है कि ‘परमाणु संलयन’ की प्रतिक्रिया के शुरू होने में जितनी ऊर्जा इस्तेमाल हो, उससे ज्यादा ऊर्जा प्रतिक्रिया की वजह से बाद में उत्पाद के तौर पर निकले। फ्रांस से पहले चीन ने परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में लंबी छलांग मारी। उसने कुछ समय पहले अपने न्यूक्लियर फ्यूजन रिएक्टर को चालू कर दिया। चीन का यह एचएल-2एम टोकामैक संयंत्र चीन का सबसे बड़ा और अत्याधुनिक संयंत्र है और चीनी वैज्ञानिकों ने उम्मीद जताई है कि इस डिवाइस की मदद से शक्तिशाली स्वच्छ ऊर्जा के स्रोत का खनन किया जा सकेगा। इस संयंत्र में ताकतवर चुबंकीय ऊर्जा क्षेत्र का इस्तेमाल गर्म प्लाज्मा को फ्यूज करने और 15 करोड़ डिग्री सेल्सियस के तापमान तक पहुंचा जाता है।
यह सूरज की कोर से दस गुना ज्यादा गर्म है। दक्षिण पश्चिम के सिचुआन प्रांत में स्थित संयंत्र को पिछले साल पूरा किया गया था। इसे निकलने वाली गर्मी और ऊर्जा की वजह से इसे सूरज कहा गया है।चीन ने अपने अत्याधुनिक संयंत्र को पहली बार पिछले साल 2020 में स्टार्ट किया गया था। तब इस संयंत्र में 100 सेकेंड के लिए 10 करोड़ डिग्री सेंटीग्रेड का तापमान पैदा किया गया था। दूसरी बार में चीन ने 12 करोड़ डिग्री सेंटीग्रेड का तापमान पैदा किया।
जानकारों की राय में परमाणु संलयन ऊर्जा का विकास न सिर्फ ऊर्जा की जरूरतों को पूरा करेगा, बल्कि भविष्य में चीन की ऊर्जा और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के सतत विकास के लिए अहम है। चीन के वैज्ञानिक साल 2006 से ही परमाणु संलयन संयंत्र के छोटे प्रारूप पर काम करते आए हैं। उनकी कोशिश है कि संयंत्र का इस्तेमाल आइटीईआर के साथ किया जा सके। फ्रांस का आइटीईआर दुनिया का सबसे बड़ा परमाणु फ्यूजन रिसर्च प्रॉजेक्ट है, जिसे 2025 में पूरा किया जा सकता है।
अमेरिका में पहले ही इस्तेमाल हो रहा है तो फिर ब्रिटेन में परीक्षण क्यों हो रहे हैं? कंपनी इस टेस्ट का इस्तेमाल फिलहाल कर रही है, लेकिन अलग-अलग लोगों पर टेस्ट कितने सटीक नतीजे दे सकता है ये पता करने के लिए 1.40 लाख लोगों पर परीक्षण किए जा रहे हैं। कंपनी ने 50 से 77 साल के लोगों को परीक्षण में भाग लेने को कहा है।
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